10-CGLRC - 01. सीमांकन
नक्शा और सीमांकन
जमीन का पहला कागज यानि नक्शे से ही खसरा बनेगा और खसरे से बी1.
* सीमांकन के लिए आवेदन तहसील न्यायालय में दिया जाएगा।
* आवेदन के साथ भूमि का बी1/ खसरा व नक्शा की प्रति लगाना होगा।
* सीमांकन के लिए शुल्क ₹50 प्रति खसरा होगी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति का सीमांकन निशुल्क होगा।
* आवेदन के 90 दिन के भीतर सीमांकन होगी।
* सीमांकन तहसीलदार या RI की उपस्थिति में होगी। इसके लिए भूधारक एवं आसपास की भूमि के भूधारकों को उपस्थिति हेतु सूचित भी किया जाएगा।
* सीमांकन के समय पंचनामा, फील्डबुक, नक्शा और सीमांकन रिपोर्ट बनाए जाएंगे।
* सीमांकन के समय सीमाचिन्ह लगाए जाएंगे, जिन्हें नुकसान पहुंचाना दंडनीय होगा।
* सीमांकन से असंतुष्ट व्यक्ति अपनी आपत्ति तहसीलदार को लिखेगा जिसकी सुनवाई करने के बाद सीमांकन पर तहसीलदार अंतिम आदेश लिखेगा।
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधान:
धारा 107 हर ग्राम का एक नक्शा तैयार किया जाएगा।
धारा 124 गांव की सीमाओं का स्थाई सीमाचिन्हों द्वारा सीमांकन किया जाएगा। प्रत्येक भूधारक इन सीमाचिन्ह की रक्षा और मरम्मत के लिए जिम्मेदार होगा।
धारा 125 सीमा विषयक विवाद तहसीलदार द्वारा जांच किए जाएंगे।
धारा 126 किसी सदस्य कब्जा रखने वाले को तहसीलदार बेदखल कर सकेगा। अपना हक पाने के लिए बेदखली के एक साल के भीतर सिविल वाद लाया जा सकेगा।
धारा 127 सामुदायिक भूमि से लगी भूमि का भूधारक सामुदायिक भूमि का सीमाचिन्हों से सीमांकन करेगा एवं सीमाचिन्हों का मरम्मत करेगा। भूधारक द्वारा न किए जाने पर तहसीलदार करेगा एवं खर्चा उससे वसूलेगा।
धारा 129 तहसीलदार या सशक्त राजस्व अधिकारी (RO) किसी भूमि के हितबद्ध व्यक्ति के आवेदन पर सीमांकन कर सकेगा और सीमाचिन्ह बनवा सकेगा।
धारा 130 स्थापित सीमाचिन्ह को जानबूझकर हटाने वाले से ₹5000 प्रति सीमाचिन्ह वसूला जा सकेगा।
धारा 256 समस्त राजस्व अभिलेख, नक्शे तथा भूअभिलेख की प्रमाणित प्रतिलिपि उन समस्त व्यक्तियों को दी जाएंगी, जो उनके लिए आवेदन करें।
PS: सरलीकरण, बोधगम्यता एवं आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अधिनियम व नियम के कुछ शब्द छोड़ दिए गए हैं एवं बदल दिए गए हैं, भाव यथावत हैं।
जमीन का पहला कागज यानि नक्शे से ही खसरा बनेगा और खसरे से बी1.
* सीमांकन के लिए आवेदन तहसील न्यायालय में दिया जाएगा।
* आवेदन के साथ भूमि का बी1/ खसरा व नक्शा की प्रति लगाना होगा।
* सीमांकन के लिए शुल्क ₹50 प्रति खसरा होगी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति का सीमांकन निशुल्क होगा।
* आवेदन के 90 दिन के भीतर सीमांकन होगी।
* सीमांकन तहसीलदार या RI की उपस्थिति में होगी। इसके लिए भूधारक एवं आसपास की भूमि के भूधारकों को उपस्थिति हेतु सूचित भी किया जाएगा।
* सीमांकन के समय पंचनामा, फील्डबुक, नक्शा और सीमांकन रिपोर्ट बनाए जाएंगे।
* सीमांकन के समय सीमाचिन्ह लगाए जाएंगे, जिन्हें नुकसान पहुंचाना दंडनीय होगा।
* सीमांकन से असंतुष्ट व्यक्ति अपनी आपत्ति तहसीलदार को लिखेगा जिसकी सुनवाई करने के बाद सीमांकन पर तहसीलदार अंतिम आदेश लिखेगा।
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधान:
धारा 107 हर ग्राम का एक नक्शा तैयार किया जाएगा।
धारा 124 गांव की सीमाओं का स्थाई सीमाचिन्हों द्वारा सीमांकन किया जाएगा। प्रत्येक भूधारक इन सीमाचिन्ह की रक्षा और मरम्मत के लिए जिम्मेदार होगा।
धारा 125 सीमा विषयक विवाद तहसीलदार द्वारा जांच किए जाएंगे।
धारा 126 किसी सदस्य कब्जा रखने वाले को तहसीलदार बेदखल कर सकेगा। अपना हक पाने के लिए बेदखली के एक साल के भीतर सिविल वाद लाया जा सकेगा।
धारा 127 सामुदायिक भूमि से लगी भूमि का भूधारक सामुदायिक भूमि का सीमाचिन्हों से सीमांकन करेगा एवं सीमाचिन्हों का मरम्मत करेगा। भूधारक द्वारा न किए जाने पर तहसीलदार करेगा एवं खर्चा उससे वसूलेगा।
धारा 129 तहसीलदार या सशक्त राजस्व अधिकारी (RO) किसी भूमि के हितबद्ध व्यक्ति के आवेदन पर सीमांकन कर सकेगा और सीमाचिन्ह बनवा सकेगा।
धारा 130 स्थापित सीमाचिन्ह को जानबूझकर हटाने वाले से ₹5000 प्रति सीमाचिन्ह वसूला जा सकेगा।
धारा 256 समस्त राजस्व अभिलेख, नक्शे तथा भूअभिलेख की प्रमाणित प्रतिलिपि उन समस्त व्यक्तियों को दी जाएंगी, जो उनके लिए आवेदन करें।
PS: सरलीकरण, बोधगम्यता एवं आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अधिनियम व नियम के कुछ शब्द छोड़ दिए गए हैं एवं बदल दिए गए हैं, भाव यथावत हैं।
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